तितली और तुम

तुम रंग बिरंगा पहने हो, खुद की कालिख से डरते हो? तुम खुश जो इतना दिखते हो, जो मन चाहे वो करते हो?

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तुम्हे क्या बताऊँ

कभी खुद से तो कभी दुसरों से, भागता ही जा रहा हूँ बस। तुम्हे क्या बताऊँ, चलना और कितना? भरे जलधि में नाव के जितना। ना राह दिख रही है ना नज़ारे, दिमाग को धड़कता दिल दिख रहा है बस। तुम्हे क्या बताऊँ, देखना मुझे किसको? घने धुंये में ओझल होते खुदको। ना शोर सुनाई … Continue reading तुम्हे क्या बताऊँ