लड़खड़ाता भारत

बहुत साल पहले भारत जवान हुआ करता था , बड़ा स्वाभिमानी था, इंसानियत से झुका रहता था, फिर कुछ लोगो ने भारत को अपने कब्जे में ले लिया, भारत पिटा, कुछ आँसू भी रोया होगा शायद, पर स्वाभिमानी फिर भी था मेरा भारत। फिर उन लोगो को धीरे-धीरे जाने पर मजबूर होना पड़ा , हम … Continue reading लड़खड़ाता भारत

Advertisements

वो पतले कागज की कश्ती

कभी कभी उसे भी अपनी क्षमता पर संदेह होता है, पर वो रुकता नहीं है। कभी कभी उसे भी डर लगता है, पर वो झुकता नहीं है। वो भी निसंदेह सावन की पहली बारिश में नाचना चाहता है, पर इस बार वो सहम के रह जाता है। वो हर बार कुछ नया करना चाहता है, … Continue reading वो पतले कागज की कश्ती

चार दिन खड़गपुर में

चार दिन पहले ही तो खड़ा था खड़गपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर, हाथ में दो बड़े बैग और चेहरे पे उससे भी बड़ी मुस्कान थी। जब कैंपस के अन्दर आया, पहला दिन तो खरड़गपुर को समझने में गवाया। दूसरा दिन जब समझ मैं पाया, इसने मुझे बहुत हँसाया। तीसरे दिन मैं मायूस बहुत … Continue reading चार दिन खड़गपुर में