भंगाधर

भंगा मधु का है स्रोत अजर, दाहक प्रचण्ड दर्द भंगा। मन मुदित रम्य सुमन भाँति, प्रज्वलित रग में शोणित गंगा।

Advertisements

रात

हम प्यार न इतना कर पाते, न तेरे प्रेमी बन पाते। गर कर पाते तो डर-डर के, हाँ, बन पाते तो मर-मर के। तुम मर-डर के इतनी न भाती, जो ये रात बीच मे न आती।